साहित्य का इतिहास-आवश्यकता, समस्याएँ एवँ सम्भावनाएँ
DOI:
https://doi.org/10.56614/tqza1r17Abstract
साहित्यिक दृष्टि से इतिहास का अर्थ है “ऐसा ही था” या “ऐसा ही हुआ”। इस दृष्टि से अतीत की किसी भी वास्तविक घटना या बात को इतिहास कहा जा सकता है, किन्तु हर घटना इतिहास नहीं बन सकती। कुछ अत्यन्त महत्वपूर्ण, विराट, संघर्षणात्मक घटनाएँ, जिनके पीछे कोई रहस्य, रोमांच, सिद्धांत या लिप्सा है अनुसंधान या चिंतन जुड़ा होता है, वे इतिहास के अंतर्गत आती हैं। प्रत्येक व्यक्ति जो कुछ देखता है, उसमें उसकी वैयक्तिक रुचि के साथ-साथ उसके युग की सामूहिक चेतना, उसके बौद्धिक विकास एवं उसकी भावात्मक प्रवृत्तियों का प्रभाव भी मिश्रित होता है। इसलिए उसका अतीत संबंधी आख्यान भी अन्य व्यक्ति के आख्यान से थोड़ा-बहुत भिन्न होता है। और इसी भिन्नता के कारण इतिहास का अर्थ भी समय-समय पर परिवर्तित होता रहता है।
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