आर्थिक विकास में सिख धर्म की भूमिका: सामाजिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक कारकों का विश्लेषण
Abstract
सिख धर्म भारतीय उपमहाद्वीप की एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक परंपरा है, जिसने केवल आध्यात्मिक जीवन को ही नहीं, बल्कि सामाजिक संगठन, श्रम नैतिकता, सामुदायिक सहयोग और आर्थिक गतिविधियों को भी गहराई से प्रभावित किया है। यह अध्ययन आर्थिक विकास पर सिख धर्म के प्रभाव का सामाजिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण करता है। सिख धर्म की मूल शिक्षाएँ, जैसे श्रम की गरिमा, ईमानदारी से आजीविका अर्जित करना, सामूहिक कल्याण, सेवा-भावना और संसाधनों के न्यायपूर्ण उपयोग, आर्थिक व्यवहार और विकास की प्रक्रियाओं को प्रेरित करती रही हैं। विशेष रूप से “किरत करो, नाम जपो, वंड छको” की अवधारणा व्यक्ति को परिश्रम, नैतिक आय और सामाजिक साझेदारी की ओर उन्मुख करती है, जो आर्थिक विकास के लिए एक सुदृढ़ आधार प्रस्तुत करती है।
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