माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों में निजी ट्यूशन की प्रवृत्ति: भोपाल जिले के शहरी और ग्रामीण विद्यालयों का तुलनात्मक विश्लेषण
Keywords:
निजी ट्यूशन, माध्यमिक शिक्षा, शहरी-ग्रामीण तुलना, शैक्षणिक उपलब्धि, सामाजिक-आर्थिक असमानताAbstract
यह अध्ययन भोपाल जिले के शहरी एवं ग्रामीण माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों में निजी ट्यूशन की प्रवृत्तियों और उसके शैक्षणिक तथा सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अनुसंधान में 400 विद्यार्थियों (200 शहरी एवं 200 ग्रामीण) का चयन स्तरीकृत यादृच्छिक नमूना पद्धति से किया गया। डेटा संग्रह हेतु प्रश्नावली और साक्षात्कार का प्रयोग किया गया तथा आँकड़ों का विश्लेषण प्रतिशत, t-test और χ²-test द्वारा किया गया। परिणामों से ज्ञात हुआ कि शहरी क्षेत्रों में 75% और ग्रामीण क्षेत्रों में 52% विद्यार्थी नियमित ट्यूशन लेते हैं। ट्यूशन लेने के प्रमुख कारणों में विद्यालय में पर्याप्त ध्यान न मिलना, कठिन विषयों की तैयारी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और अभिभावकीय दबाव शामिल रहे। औसत अंक के आधार पर यह पाया गया कि ट्यूशन लेने वाले विद्यार्थियों का प्रदर्शन (68.4%) बिना ट्यूशन लेने वालों (59.7%) से बेहतर है। साथ ही शहरी विद्यार्थियों का ट्यूशन खर्च ग्रामीण विद्यार्थियों की तुलना में अधिक पाया गया, जो सामाजिक-आर्थिक असमानताओं की ओर संकेत करता है। अध्ययन से निष्कर्ष निकलता है कि निजी ट्यूशन विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धि में सहायक तो है, किंतु यह शिक्षा में विषमता को भी बढ़ावा देता है। अतः विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और निजी ट्यूशन को अधिक समावेशी बनाना नीति-निर्माताओं के लिए आवश्यक है।
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