विभूति नारायण राय एवं उनका उपन्यास ‘तबादला’ एक समीक्षा

Authors

  • अभिजीत कुमार सिंह Author

Keywords:

बिजनेसमैन, पोलिटीशियन, ब्युरोक्रैट, न्यायपालिका, साइंटिफिक लेखन, विस्फोटक

Abstract

कहना बड़ा मुश्किल है। बिजनेसमैन, पोलिटीशियन, ब्युरोक्रैट सभी हैं, जहां जिसको मौका मिलता है.. .पहले हमारी कुछ पवित्र संस्थाएं थीं, जैसे जुडीशियरी, एजुकेशन और हैल्थ। अब आप डॉक्टरों की इन्कम की तो कल्पना ही नहीं कर सकते। यही हाल न्यायपालिका का है। पत्रकारिता एक जमाने में आदर्श थी। कोई आदमी अखबार की दुनिया में जाता था, तो इसका मतलब होता था कि उसके कुछ आदर्श थे। अब जो हमारी पवित्र संस्थाएं थीं।

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Published

2025-10-15

How to Cite

विभूति नारायण राय एवं उनका उपन्यास ‘तबादला’ एक समीक्षा. (2025). अमृत काल (Amrit Kaal), ISSN: 3048-5118, 3(4), 1-4. https://languagejournals.com/index.php/amritkaal_Journal/article/view/95

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